कांवड़ यात्रा के कारण 17 से 26 जुलाई की रात 12 बजे तक रूट डायवर्जन किया गया था, जिससे जनजीवन और कारोबार प्रभावित रहा। रूट डायवर्जन खत्म होने से बुधवार को कारोबार और जनजीवन पटरी पर लौटता नजर आया। शहर की सड़कों, बाजारों और अस्पतालों में भीड़ रही। टाले गए ऑपरेशन हुए। मंडियां, गैस एजेंसी, पेट्रोल पंप और उद्योग आदि सभी क्षेत्रों के कारोबार में गति देखने को मिली। हालांकि पूरी तरह से पटरी पर लौटने में दो तीन दिन और लग जाएंगे।
मार्ग बंद होने से शहर की गैस आपूर्ति प्रभावित रही। अधिकतर गैस एजेंसियों के गोदाम गैस सिलिंडर से खाली हो गए थे। मार्गों पर लगीं बैरिकेडिंग हटी तो गैस सिलिंडर से भरी गाड़ियां गोदामों तक पहुंचीं। जिला गैस वितरक संघ के अध्यक्ष नमो जैन का कहना है कि अब गैस की कोई दिक्कत नहीं रहेगी। वहीं, चार दिन बाद नवीन सब्जी, गल्ला और फल मंडी में भी रौनक लौटी। बाहर से गल्ला जैसे दाल, चावल, दलहन, मसाले, सब्जी और फलों आदि लेकर आने वाली गाड़ियां मंडी पहुंची।
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वहीं दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर बुधवार सवेरे आठ बजे से वाहन फर्राटा भरने लगे। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की ओपीडी में भी मरीजों की संख्या 50 फीसदी कम हो गई थी। पथरी, पित्त और आंखों आदि के ऑपरेशन टाले जा रहे थे, जो शुरू हो गए हैं।
रोडवेज को 1.80 करोड़ की राजस्व की हानि, यात्री भी रहे परेशान
कांवड़ यात्रा के दौरान रोडवेज को एक करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ। रूट डायवर्जन से पहले जहां रोडवेज को प्रतिदिन एक करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति हो रही थी, वह घटकर 32 लाख रुपये तक पहुंच गई। कांवड़ यात्रा को लेकर परिवहन निगम की ओर से 19 जुलाई को भैसाली डिपो को सोहराब गेट डिपो शिफ्ट किया गया। 19 जुलाई को निगम को 99 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
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20 जुलाई को 81 लाख, 21 को 76 लाख, 22 को 66 लाख, 23 को 64.52 लाख, 24 को 52 लाख, 25 को 46 लाख और 26 जुलाई को 32 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। प्रतिदिन दिन अगर एक करोड़ की आय के हिसाब से सात दिनों में रोडवेज को रूट डायवर्जन से करीब 1.80 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। आरएम केके शर्मा ने बताया कि बसें तो पर्याप्त थीं लेकिन रूट डायवर्जन के बाद से यात्रियों की संख्या घट गई, जिस कारण विभाग को राजस्व की हानि हुई।
कारोबार: समय से नहीं जा सका माल, उठाना पड़ा नुकसान
कावंड़ यात्रा का असर उद्योगों पर पड़ा। इंडस्ट्री से तैयार माल एक्सपोर्ट नहीं हो सका। कच्चा माल फैक्टरियों तक नहीं पहुंच पाया जिस कारण ऑर्डर लेट हुए। परतापुर इंडस्ट्री एस्टेट मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष निपुण जैन ने बताया कि कच्चा माल फैक्टरियों तक नहीं पहुंच सका, जिस कारण उत्पादन नहीं हो पायाय, जो तैयार माल था वह कंटेनर न पहुंच पाने के कारण एक्सपोर्ट नहीं हो पाया। आईआईए अध्यक्ष सुमनेश अग्रवाल ने कहा उद्यमियों को इससे काफी नुकसान पहुंचा है।
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कांवड़ यात्रा के कारण 17 से 26 जुलाई की रात 12 बजे तक रूट डायवर्जन किया गया था, जिससे जनजीवन और कारोबार प्रभावित रहा। रूट डायवर्जन खत्म होने से बुधवार को कारोबार और जनजीवन पटरी पर लौटता नजर आया। शहर की सड़कों, बाजारों और अस्पतालों में भीड़ रही। टाले गए ऑपरेशन हुए। मंडियां, गैस एजेंसी, पेट्रोल पंप और उद्योग आदि सभी क्षेत्रों के कारोबार में गति देखने को मिली। हालांकि पूरी तरह से पटरी पर लौटने में दो तीन दिन और लग जाएंगे।
मार्ग बंद होने से शहर की गैस आपूर्ति प्रभावित रही। अधिकतर गैस एजेंसियों के गोदाम गैस सिलिंडर से खाली हो गए थे। मार्गों पर लगीं बैरिकेडिंग हटी तो गैस सिलिंडर से भरी गाड़ियां गोदामों तक पहुंचीं। जिला गैस वितरक संघ के अध्यक्ष नमो जैन का कहना है कि अब गैस की कोई दिक्कत नहीं रहेगी। वहीं, चार दिन बाद नवीन सब्जी, गल्ला और फल मंडी में भी रौनक लौटी। बाहर से गल्ला जैसे दाल, चावल, दलहन, मसाले, सब्जी और फलों आदि लेकर आने वाली गाड़ियां मंडी पहुंची।
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