People Raised The Demand For Sterilization Of Stray Dogs After Girl Death In Agra - आगरा में 40 हजार आवारा कुत्ते : एक साल में 1.40 लाख लोगों को काटा, बच्ची की मौत के बाद उठी नसबंदी की मांग

Javed Ashraf
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मेयर साहब, कुत्तों का रजिस्ट्रेशन बाद में करिए, लेकिन पहले सड़कों पर घूम रहे आवारा कुत्तों की नसबंदी करा दीजिए, ताकि कुत्तों के काटने की घटनाएं और न हों। कुछ कीजिए। मूक बधिर बच्ची गुंजन की कुत्तों के काटने के कारण सेप्टिक से हुई मौत के बाद आगरा के लोगों ने सोशल मीडिया पर भावुक होकर इस तरह की अपील की है।
 
ताजनगरी में पिछले माह कुत्ते और बंदरों ने 11892 लोगों को काटा, लेकिन नगर निगम बीते माह केवल 27 कुत्तों का बंधियाकरण ही कर पाया। आंकड़ों को देखें तो हर दिन एक कुत्ते की नसबंदी नहीं की जा रही। एक साल में ही शहर के 1.40 लाख लोग कुत्तों के काटने के कारण रैबीज का इंजेक्शन लगवा चुके हैं। यह जिला अस्पताल के आंकड़े हैं। प्राइवेट इंजेक्शन की संख्या इससे अलग है।

शहर की सड़कों पर घूम रहे 40 हजार कुत्ते 

नगर निगम ने डेढ़ साल में केवल 441 कुत्तों की नसबंदी की है। निगम के पशु चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के पास केवल एक टीम है जो कुत्तों को पकड़कर पीपुल्स फॉर एनीमल (पीएफए) को नसबंदी के लिए सौंपती है। नसबंदी स्रह्य बाद इन कुत्तों को वापस उन्हीं जगहों पर छोड़ दिया गया। शहर में 40 हजार से ज्यादा कुत्ते सड़कों पर घूम रहे हैं।

50 लाख रुपये का बजट, खर्च 9.63 लाख

नगर निगम के पशु चिकित्सा विभाग को नगर निगम सदन ने बीते साल 50 लाख रुपये कुत्तों की नसबंदी के लिए बजट दिया था, लेकिन विभाग केवल 9.63 लाख रुपये ही खर्च कर पाया। इस बजट से 3500 से ज्यादा कुत्तों की नसबंदी की जा सकती है।

पीएफए पर निर्भर नगर निगम

नगर निगम के पशु चिकित्साधिकारी एके सिंह ने बताया कि कुत्तों की नसबंदी के लिए हम पीएफए पर निर्भर हैं। शिकायत मिलने पर वह हमारी टीम के साथ जाकर नसबंदी करते हैं। उसके लिए भुगतान नगर निगम करता है। 

कॉलोनीवार करें कार्रवाई

कैस्पर्स होम की विनीता अरोड़ा ने कहा कि कुत्तों की नसबंदी के लिए कॉलोनीवार कार्रवाई करनी चाहिए। कुत्तों के खाने-पीने का इंतजाम भी हो तो वह चिड़चिड़े होकर कभी हमला नहीं करेंगे।

चारों जोन में रखी जाएंगी नसबंदी के लिए टीमें

मेयर नवीन जैन ने मूक बधिर बच्ची गुंजन के दम तोड़ने की घटना को दुखद बताया। उन्होंने अमर उजाला को बताया कि छत्ता, हरीपर्वत, लोहामंडी और ताजगंज जोन में नगर निगम अभियान के रूप में 25 कुत्तों को पकड़कर नसबंदी कराएगा। इस तरह प्रतिदिन 100 कुत्तों को पकड़कर नसबंदी कराई जाएगी, जिससे एक माह में ही लोगों को इसके असर नजर आए। नगर आयुक्त से इस अभियान की व्यवस्थाएं करने और समीक्षा के लिए कहा है।

बोदला, मंटोला, बल्केश्वर में मामले ज्यादा

शहर में बोदला, आवास विकास, बल्केश्वर, सुल्तानगंज की पुलिया, यमुनापार रामबाग, शहीद नगर, मंटोला क्षेत्र से कुत्तों के काटने के मामले जिला अस्पताल में ज्यादा आते हैं। इन जगहों पर मीट की बिक्री होती है। 

गाजियाबाद ने डॉग हाउस बनाए

गाजियाबाद में वैशाली की सोसाइटीज ने आवारा कुत्तों के लिए डॉग हाउस बनाए हैं, जो किसी पार्क या क्षेत्र के कोने में हैं। लोहे की जाली से बने डॉग हाउस में खाने के बर्तन, पीने के लिए कटोरे हैं, जहां लोग दूध, ब्रेड, पानी देने पहुंचते हैं। आसपास के कुत्ते उन्हीं डॉग हाउस में पहुंचते हैं, जहां से नगर निगम की टीमें उन्हें पकड़कर नसबंदी कर तीन दिन में वापस छोड़ देती हैं।

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मेयर साहब, कुत्तों का रजिस्ट्रेशन बाद में करिए, लेकिन पहले सड़कों पर घूम रहे आवारा कुत्तों की नसबंदी करा दीजिए, ताकि कुत्तों के काटने की घटनाएं और न हों। कुछ कीजिए। मूक बधिर बच्ची गुंजन की कुत्तों के काटने के कारण सेप्टिक से हुई मौत के बाद आगरा के लोगों ने सोशल मीडिया पर भावुक होकर इस तरह की अपील की है।

 

ताजनगरी में पिछले माह कुत्ते और बंदरों ने 11892 लोगों को काटा, लेकिन नगर निगम बीते माह केवल 27 कुत्तों का बंधियाकरण ही कर पाया। आंकड़ों को देखें तो हर दिन एक कुत्ते की नसबंदी नहीं की जा रही। एक साल में ही शहर के 1.40 लाख लोग कुत्तों के काटने के कारण रैबीज का इंजेक्शन लगवा चुके हैं। यह जिला अस्पताल के आंकड़े हैं। प्राइवेट इंजेक्शन की संख्या इससे अलग है।

शहर की सड़कों पर घूम रहे 40 हजार कुत्ते 

नगर निगम ने डेढ़ साल में केवल 441 कुत्तों की नसबंदी की है। निगम के पशु चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के पास केवल एक टीम है जो कुत्तों को पकड़कर पीपुल्स फॉर एनीमल (पीएफए) को नसबंदी के लिए सौंपती है। नसबंदी स्रह्य बाद इन कुत्तों को वापस उन्हीं जगहों पर छोड़ दिया गया। शहर में 40 हजार से ज्यादा कुत्ते सड़कों पर घूम रहे हैं।



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